स्तुती

ॐदुर्गेदेवी उमा विस्व जननी रमा             

माँ  तू तारा,एक जगदम्बा तेरा  सहारा।।धृ ।।

शैल जास्कंध माता भवानी

पर्वती भद्र काली  मृडाणी

अष्ट सिद्धि प्रदे सर्वसिद्धि प्रदे त्रिपुरारा,

एक जगदंब तेरा  सहारा ।।१।।

 

तेरे मुंडन कि गलमालिका है

जो अखिलविश्व की पालिका है |

रूप विक्रलीला कलिका चण्डिका

रुद्रधारा एक जगदंब तेरा सहारा||२||

 

पुण्यवाणो  के घर सपंदा तु

पापियो के भवन आपदा तु

कुलकि लज्जा तु ही साधु श्रद्धा तू ही

विश्व सरा एक जगदंब तेरा सहारा ||३||

 

है हजारो माँ अपराध मेरे

है अधम पायकी नियत तेरे

कष्ट होव अदा फिर भी माँ को सदा

पुत्र प्यार  एक जगदंब तेरा सहारा || ४||

 

मन वचन दोनो ने हार खायी

पार पाइयो मेरा नही कोई माई

क्या कहे निर्वचन वेद वाणी कथन

कह के हरा एक जगदंब तेरा सहारा ||५ ||

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